नासिक गणतंत्र दिवस विवाद में मंत्री गिरीश महाजन पर महिला कर्मचारी ने डॉ. आंबेडकर का नाम न लेने का आरोप लगाया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें | 4 AM NEWS
नासिक गणतंत्र दिवस विवाद – मंत्री महाजन पर महिला कर्मचारी का आरोप
नासिक गणतंत्र दिवस विवाद इस साल 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में अचानक सुर्खियों में आ गया।
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री गिरीश महाजन मंच से भाषण दे रहे थे, तभी एक महिला कर्मचारी ने अचानक विरोध जताया।
🔹 घटना का पूरा विवरण
वीडियो और रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला कर्मचारी ने मंत्री महाजन पर आरोप लगाया कि उन्होंने भाषण के दौरान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का नाम नहीं लिया, जो संविधान के निर्माता हैं।
- महिला ने उच्च आवाज़ में कहा,
“गणतंत्र दिवस पर संविधान निर्माता का नाम न लेना गलत है।” - मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
- पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और महिला को मंच से हटाया गया।
🔹 मंत्री गिरीश महाजन का बयान
मंत्री महाजन ने कहा:
“डॉ. आंबेडकर का नाम न लेना केवल अनजाने में हुई चूक थी। मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। इसके लिए मैं सार्वजनिक रूप से माफी मांगता हूँ।”
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे ने बहस को जन्म दे दिया है। विपक्ष ने इसे संविधान के अपमान के रूप में देखा और तीखी प्रतिक्रिया दी।
🔹 राजनीतिक और सामाजिक पहलू
- राजनीतिक दृष्टि: विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रीय पर्वों पर संवैधानिक मूल्यों का सम्मान सबसे जरूरी है।
- सामाजिक असर: आम जनता में यह सवाल उठता है कि क्या गणतंत्र दिवस जैसे मौके पर चूक स्वीकार की जा सकती है।
- संभावित प्रभाव: इस घटना से आगे राजनीतिक बयानबाज़ी और मीडिया में चर्चा बढ़ सकती है।
🔹 विशेषज्ञों की राय
- राजनीतिक विश्लेषक: “गणतंत्र दिवस पर संविधान निर्माता का नाम न लेना न केवल protocल का मसला है बल्कि यह लोकतांत्रिक प्रतीक के सम्मान से जुड़ा हुआ है।”
- सोशल मीडिया रिएक्शन: कई लोगों ने मंत्री की माफी को स्वीकार किया, जबकि कुछ ने इसे गंभीर मुद्दा बताया।
🔹 निष्कर्ष
नासिक गणतंत्र दिवस विवाद ने यह साफ कर दिया कि राष्ट्रीय पर्वों पर संवैधानिक मूल्यों और प्रतीकों का सम्मान अनिवार्य है।
यह घटना केवल एक व्यक्तिगत चूक नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान के प्रति सतर्क रहने का संदेश है।











