UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से केंद्र सरकार को झटका। पुराने नियम लागू रहेंगे, अगली सुनवाई तय। पूरी खबर पढ़ें।
UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी और निर्णायक खबर बनकर सामने आई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इस फैसले को केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब देशभर में इन नियमों को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज हो चुके थे।
🔴 सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
नई दिल्ली में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने नए UGC नियमों की भाषा और मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कहा कि नियम पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं हैं और इनसे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। अदालत ने यहां तक पूछा कि क्या ऐसे नियम बनाकर हम शिक्षा व्यवस्था को “उल्टी दिशा” में ले जा रहे हैं।
कोर्ट का साफ कहना था कि कानून या नियम ऐसे होने चाहिए, जिनमें भ्रम की कोई गुंजाइश न हो, खासकर तब जब बात शिक्षा संस्थानों और छात्रों के भविष्य से जुड़ी हो।
🔴 पुराने नियम ही रहेंगे लागू
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई तक दो हजार बारह के UGC नियम ही प्रभावी रहेंगे। यानी नए नियमों के तहत फिलहाल कोई भी कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित विशेषज्ञ इन नियमों की भाषा को सरल और स्पष्ट रूप में समझाएं।
👉 अगली सुनवाई की तारीख: उन्नीस मार्च
🔴 विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
UGC के नए नियमों को जाति आधारित भेदभाव रोकने के उद्देश्य से लाया गया था। लेकिन याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि—
- जांच और शिकायत का अधिकार एक ही पक्ष को दिया गया
- इससे सामान्य वर्ग के खिलाफ दुरुपयोग संभव है
- शिक्षा संस्थानों में अनावश्यक भय का माहौल बनेगा
इन्हीं आशंकाओं को लेकर देशभर में छात्र संगठनों और शिक्षाविदों ने विरोध जताया, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
🔴 “एकता दिखनी चाहिए, टकराव नहीं”
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शिक्षा संस्थान देश की एकता का प्रतीक होते हैं। यहां जाति विहीन और समावेशी वातावरण होना चाहिए। अदालत के अनुसार नियम ऐसे हों, जो समाज को जोड़ें, न कि नए विवाद पैदा करें।
🔴 विशेषज्ञों की राय में, सुप्रीम कोर्ट की यह रोक शिक्षा क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम है।
🔴 आगे क्या?
अब सभी की नजरें केंद्र सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह तय होगा कि—
- नियमों में संशोधन होगा
- भाषा बदली जाएगी
- या पूरे ढांचे पर दोबारा विचार किया जाएगा











